इतने बर्बर ग़ुनाह की सज़ा मात्र तीन साल: पीड़िता की मां
शनिवार, 31 अगस्त, 2013 को 18:21 IST तक के समाचार
दिल्ली गैंगरेप के मामले में घटना
के सामय नाबालिग अभियुक्त को तीन साल के लिए सुधार गृह भेजे जाने के
फ़ैसले पर पीड़िता के परिवार ने नाराज़गी ज़ाहिर की है. परिवार का कहना है
कि वो जुवेनाइल कोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील करेंगे.
मृतक युवती की मां का कहना है, "जब तीन साल की सज़ा देनी थी तो पहले ही दे देते. मुझे ये फैसला मंज़ूर नहीं है."फ़ैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा, "अभियुक्त भावनात्मक और मानसिक रूप से परिपक्व है. उसे पता था कि वह क्या कर रहा है. मैं अब सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटीशन फाइल करूँगा और इस फ़ैसले को रद्द करने की अपील करूँगा."
ट्विटर पर भी गुस्सा
सोशल मीडिया में भी जुवेनाइल कोर्ट के फैसले को लेकर लोगों ने नाराज़गी प्रकट की है. ट्विटर पर इस मामले को लेकर कड़ी प्रतिक्रयाएँ आई हैं. ज़्यादातर लोगों का कहना है कि तीन साल की सज़ा बहुत कम है.अनुपम खेर @AnupamPkher
ऐसे अपराध के लिए सुधार गृह में केवल तीन साल की सज़ा.. वाह रे मेरे देश का इंसाफ़ और क़ानून. मैं अपने देश की न्याय प्रणाली पर शर्मिंदा हूँ.
रतना राजैया
जरा सोचिए, तीन साल बाद वो सड़कों पर आज़ाद घूम रहा होगा. खुदा जाने उस वक्त उसके दिमाग़ में क्या चल रहा होगा.
आरओएफएल इंडियन
नाबालिग आरोपी अब अपने करियर विकल्पों के बारे में सोच रहा होगा. उसके पास तो पहले से ही मास्टर डिग्री है.
खुशबू सुंदर
नाबालिग को सिर्फ तीन साल की सजा हुई? यह भारतीय न्याय व्यवस्था के इतिहास में दुखद दिन है. इस घिनौने अपराध के लिए उसे कठोर सजा होनी चाहिए थी.
गौरव
समझ नहीं पा रहा हूँ कि नाबालिग कौन है, बलात्कारी या फिर हमारे क़ानून.
रिक्स अरोड़ा
जब अपराध नाबालिगों जैसा नहीं है तो फिर सज़ा भी नाबालिगों जैसी नहीं होनी चाहिए. क़ानून व्यवस्था पर शर्म आ रही है.
वेणु
15 साल की उम्र में मर्जी से सेक्स संबंधी क़ानून स्वीकार्य है, लेकिन बलात्कार के लिए अपराधी नाबालिग है. यही भारत है.
पठान असीम
प्रिय भारतीय अदालतों, जो व्यक्ति किसी महिला का बलात्कार कर सकता है वह नाबालिग नहीं हो सकता भले ही वो 18 साल से कम का हो.
वत्सला शुक्ला
क्या भारत के राष्ट्रपति पीड़िता को न्याय देने के लिए कुछ कर सकते हैं. यह अपराधी नाबालिग नहीं है.
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